चालान,से बचने,के लिए नहीं, मेहनत से कमाए,धन,और अपनी, कीमती,जान,बचाने,के लिए यातायात,के नियमों का करना होगा,

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चालान से बचने के लिए नहीं, मेहनत से कमाए धन और अपनी कीमती जान बचाने के लिए यातायात के नियमों का करना होगा पालन.!

सड़क,यातायात संस्कृति और हमें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार की करनी होगी जरूरत..!!

सिफारिशों के फोन कराकर पुलिस से तो बच जाओगे लेकिन दुर्घटनाओं से कैसे बच पाओगे..?

तस्लीम बेनक़ाब

हमारे देश में कभी संजीदगी से अमल नहीं किया जाता वह है बचपन से ही गली, बाजार या सड़क पर चलने के बारे में अभिभावकों द्वारा बच्चों को यातायात के नियमों को बताना और समझाना व वाहन चलाने की उचित उम्र से पहले दोपहिया न दिलवाना अगर दबाव हो तो बातचीत के माध्यम से बच्चों को समझाना,ट्रैफिक नियमों के अनुसार ही वाहन चलाने की सलाह देना तथा जब तक बच्चे की उम्र 21 साल ना हो जाएं और उसका ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य रूप से ना बन जाएं तब तक वाहन ना दें!देखा जाये तो आज भी इतना लंबा अरसा बीतने के बाद भी हमें सड़क या रास्ते पर बाईं ओर चलना नहीं आया तो कैसे माना जा सकता है कि हम यातायात नियमों के प्रति अविलंब जागरूक हो सकते हैं!यह खरा सच है कि देश की सबसे महत्त्वपूर्ण सड़को पर चलने वालों में से अधिकतर वाहन चालक मनमाने तरीके से वाहन चलाते हैं!लगभग काफी लोग गलत तरीके से बाई ओर से वाहन आगे निकालते हैं रफ्तार का ध्यान नहीं रखते!दरअसल हम सब अपनी व्यवस्था के बिगाड़े हुए हैं! इसी लिए जागरूकता कहीं नहीं दिखती! क्या ज्यादा बिगड़े हुए लोगों में सुधार की गुंजाइश नहीं है? यातायात कानून लागू करने से पहले या धूमधाम से लागू होने के बाद कोशिश हुई लेकिन कम!कानून तो लागू हो गया अब जो जुर्माना भरता है उसके कान हमेशा के लिए खड़े हो जाते हैं लेकिन जिन राज्यों में राजनीतिक मजबूरी के कारण नहीं हो पाया वहां सब बेफिक्री से चलते हैं या राजनीति के कारण उनको यातायात के नियमों में बंधने की जरुरत नही क्यों कि उनका पता हैं कि हम अपने राजनेताओं के फोन कराते ही बच जाएंगे लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि आप पुलिस से तो बच जाओगे लेकिन दुर्घटनाओं से कैसे बच पाओगे?लेकिन दूसरी तरफ देखें तो ड्राइविंग के मामलों में व्यवस्था बहुत बिगड़ी हुई है!सरकार ने ट्रैफिक कानून तो लागू करवा दिया है लेकिन साथ-साथ सड़क यातायात संस्कृति और पुलिस कार्य प्रणाली में सुधार भी जरूरी है और जिन क्षेत्रों में सड़कों का स्वास्थ्य ठीक नहीं है उनके बारे में सरकार नहीं चेतती!वाहन चालक सतर्क हो रहे हैं लेकिन अभी कितनी ही मुख्य सड़कों पर तिपहिया, स्कूटर, कार, टैक्सी, यहां तक कि बस और ट्रक वालों को भी उलटी दिशा में बिना पूरे कागजात चलते देखा जा सकता है!उन्हें इसकी आदत है और बचपन से है!इतने साल से एक दोपहिया वाहन पर तीन, कभी-कभी तो एक परिवार के चार भी सवार होते हैं! बुद्धिमान लोगों ने यह सोच कर किया होगा कि अगर चार लोग दो वाहनों पर जाएंगे तो एक और वाहन खरीदना पड़ेगा!सड़क पर पहले ही इतनी भीड़ है इस बहाने लोगों के बीच दोगुने वाहन की बिक्री हुई!कुछ लोग तो लालबत्ती है तो क्या हुआ निकल लो की यह सोच कर ऐसे कई क्षेत्रों में जहां यातायात पुलिसकर्मी खड़ा होता है इसके बावजूद लालबत्ती की अनदेखी कर निकलने वाले निकल ही जाते हैं हालांकि व पकड़े जाने की स्थिति में खिसियाकर चालान का भुगतान करते होंगे!वैसे अच्छा वाहन चालक उसे माना जाता है जो रात हो या दिन को खाली सड़क हो भीड़ भाड़ पर भी ट्रैफिक नियमों का पालन करे।

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