अच्छा,हुआ जो मोदी,जी,ने कृषि,कानून,रद्द,कर दिए,जहां,तक, पंजाब,की बात है,

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अच्छा,हुआ जो मोदी,जी,ने कृषि,कानून,रद्द,कर दिए,जहां,तक, पंजाब,की बात है,

अच्छा हुआ जो मोदी जी ने कृषि कानून रद्द कर दिए।
जहां तक पंजाब की बात है, एक जमाने में भारत का सब से तेज प्रगति करनेवाला राज्य हुआ करता था। लेकिन आज ड्रग्स ने मचाई तबाही के लिए बदनाम है। अनगिनत मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी उपलब्ध है। ड्रग्स और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल में बीते कुछ सालों में बड़े प्रमाण में इजाफा हुआ है। दलालों के कारण राज्य की ढही हुई कृषि इकोनोमी, बढ़ती बेरोजगारी और ग्रामीण इलाकों में बुरे हालात में जीत हुआ पंजाब का युवा बड़े प्रमाण में ड्रग्स की ओर मुड़ा है यह अकाट्य सत्य है। और ड्रग्स की गिरफ्त में फंसी युवा पीढ़ी, बहुत जल्द हथियार उठाने की संभावना होती आई, यह दुनिया में की जगहों पर देखने में आया है।
और बिल्कुल यही, पंजाब में हो रहा है।
कप्तान अमरिंदर सिंह कॉंग्रेसी थे, लेकिन यह सब जानते थे । बीते चार महीनों में – त्यागपत्र देने से पहले से – उनकी दिल्ली यात्राएँ बढ़ चुकी थी। दोवल साहब से उनकी बातचीत तो नियमित होती ही रहती थी और समय समय पर केंद्र को दिए हुए डॉसीऐ (Dossier) आनेवाले महासंकत की ओर अंगुलिनिर्देश कर रहे थे। सिस्टम में लगी दीमक और काँग्रेस से अड़ंगा लगाया जाना उन्हें काम करने नहीं दे रहे थे। केंद्र सरकार से उनका संपर्क भी काँग्रेस नेतृत्व को पसंद नहीं था।
और यही उनकी विकेट भी निकाल ले गया।
ऐसे में जब हाल में ड्रग्स और आतंकवाद के साथ साथ एक नए ही कॉकटेल रणनीति को पंजाबमें लागू करने की योजना की जानकारी उसके तफ़सीलवार ब्लू प्रिन्ट के साथ ही अमरिंदर सिंह ने जब मोदी जी को दिया तो उनके पाँव तले से धरती ही खिसक गई। उसके बाद मोदी जी से अमरिंदर सिंह कम से कम चार बार मिले, अमित शाह से छह बार और अजित दोवल जी से की बार औपचारिक और अनौपचारिक भेंट हुई।
ड्रग्स और आतंकवाद के साथ साथ इस समय हिन्दू सिक्ख दंगे कराने की योजना थी जिसके तहत पंजाब के ४०% हिंदुओं को टार्गेट करने का वह मास्टर प्लान था। इस खेल के पीछे दिखने कोतो ड्रग्स भले ही दिखाई दे रहे हों, यह ड्रग्स से शुरू हो कर पॉलिटिक्स तक आया हुआ नार्को पॉलिटिक्स का खेल था। इसमें माफिया ही नहीं बल्कि उनको राजनैतिक प्रश्रय देती हुई एक जमात भी सक्रिय थी। और तब तक यह मास्टर प्लान प्लानिंग स्टेज पर था, उसे कार्यान्वित करने का पहला स्टेज था अमरिंदर सिंह को इस पूरे equation से हटा देना।
तो जब उन्हें हटाया गया तबही यह साफ हुआ कि पंजाब जिस टाइम बम पर बैठा हुआ है उसे बम को नाकाम करने के लिए मोदी जी के पास बहुत काम समय बचेगा ये वे खुद भी समझ रहे थे। फिर भी मोदी जी ने एक कोशिश की; BSF का कार्यक्षेत्र बढ़ाकर पंजाब को बचाया जा सकता है ऐसी उनकी धारणा थी, लेकिन नए कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री ने ऊपरी आदेशों के अनुसार अपने अधिकारों का उपयोग कर के इसमें अड़ंगा लगा दिया।
यहाँ पर ध्यान दें – पंजाब का एरिया है ५०,३६२ वर्ग किमी । पंजाब से पाकिस्तान की सीमा लगती है, जो है ५५३ किमी। अगर BSF को ५० किमी का कार्यक्षेत्र दिया जाता तो २७,६५० वर्ग किमी एरिया अर्थात पंजाब का लगभग ५५% एरिया केन्द्रीय गृह मंत्रालय के नियंत्रण में या जाता।
मोदी सरकार का BSFका कार्यक्षेत्र बढ़ाने का प्लान असफल होने के दो परिणाम थे। पहली बात तो यह हुई कि मोदी सरकार के पास विकल्प बचे नहीं। दूसरी बात यह हुई कि जो पंजाब जलाने की योजना में लगे थे उनको समझ आ गया कि केंद सरकार को उनका प्लान समझ में या गया है, उन्हें जल्द ही कुछ करना पड सकता है।
इसीलिए किसान आंदोलन को अधिक तीव्र कर के उसे “ट्रिगर” बनाने की योजना बनी। इस आंदोलनको खालिस्तानी, टूलकिटाणु, इंटरनेशनल मीडिया और भारत में बैठे लाल हरे सांपों का संबल तो पहले से ही था। पंजाब को १९८० के दशक में वापस ले जाने के लिए ये तैयार ही बैठे थे। सिर्फ आतंकवाद फैलाना ही नहीं बल्कि उसमें पंजाब के रहनेवाले ४०% हिन्दू भी टारगेट हो रहे थे तो उन्हें कुछ भी कर के यह अवसर हाथ से जाने नहीं देना था। पक्की बात है कि उनकी प्रचार सामग्री याने ब्लॉग्स, पोस्ट्स, ट्वीट्स और याचिकाएँ ही नहीं बल्कि खबरों की हेडलाइन्स और एडिटोरियल्स भी लिखकर तैयार रखे होंगे।
लेकिन मोदी जी ने उनकी सारी योजनाएँ, मनसूबों पर पानी देर दिया।
बाकी आप ने मोदी जी का भाषण सुना ही होगा। क्या कहा मोदी जी ने ? “किसानों के लिए किया था, देश के लिए वापिस ले रहा हूँ !”

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