लद्दाख झड़प के समय सबसे पहले ofb के ही 80000 कर्मचारियों ने ही अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की थी।
Ofb फैक्टरियों का समूह है जो भारतीय सेना के लिए गोला-बारूद बनाती हैं।
इसका मुख्यालय कोलकाता में है।
अंग्रेजों के जमाने से ही इसकी मजदूर कर्मचारी यूनियन्स पर कम्युनिस्टों का कब्ज़ा है।
सभी कम्युनिस्ट चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी #CCP के वफादार होते हैं।शायद यह बड़ी न्युज आप लोगों से छुट गई है, केन्द्र सरकार ने आज लोकसभा में आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक, 2021 को पेश किया है !! ओर कल इसका अध्यादेश भी जारी कर दिया था !! इस विषय पर जाने से पहले आप लोगों को बता दुं की यह विधेयक वामपंथी यूनियनों पर एक बहुत बड़ा प्रहार है, जो कि बीच बीच में सरकार को रक्षा सामग्री उत्पादन में बाधा डालने की प्रयास करते रहते हैं !! 1962 युद्ध में यही वामपंथी यूनियनों ने चाइना का सपोर्ट करते हुए रक्षा उत्पादन में बाधा डाला था, ओर हमारी सेना को चाइना के साथ युद्ध में भारी गोलाबारूद की कमी झेलनी पड़ी थी !! यह वामपंथी युनियन अपनी मन मर्जी पर जो चाहते थे करते थे, एक साज़िशन के तहत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में यह अपनी पकड़ मजबूत करते ही जा रहे थे !! यदि आज चाइना या पाकिस्तान के साथ भारत का युद्ध हुआ ओर यह हड़ताल कर दिए तो भारत का हारना सुनिश्चित है !? इसी नेसस को तोड़ने के लिए मोदी सरकार 2014 से ही काम करना शुरु कर दिया था. सरकार ने धीरे धीरे इन सरकारी रक्षा उत्पादक फ़ैक्ट्रीयों का ढांचागत बदलाव सुरु किया, जिसको लेकर इन वामपंथियों में असंतोष बढ़ता ही गया, लेकिन सरकार इनके आगे नहीं झुकी, अपना काम करता रहा, ओर आज इसका पूरा स्वरूप बदलने के लिए यह विधेयक पेश किया है.
● चलिए विषय पर चलते हैं :- केन्द्र सरकार का यह विधेयक रक्षा संबंधी आवश्यक सेवाओं में शामिल कर्मियों के हड़ताल एवं किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन करने पर रोक लगाता है. आयुध निर्माणी बोर्ड OFB से जुड़े कई बड़े संघों ने हाल ही में सरकार के OFB को निगम बनाने के फैसले के खिलाफ अगले महीने से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी, जिसको देखते हुए आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश, 2021 लाया गया है !! एक राजपत्रित अधिसूचना के मुताबिक, रक्षा उपकरण के उत्पादन, सेवा और संचालन में शामिल कर्मचारी या सेना से जुड़े किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान के उत्पादन में शामिल कर्मचारियों के साथ ही रक्षा उत्पादों की मरम्मत और रखरखाव में कार्यरत कर्मचारी अध्यादेश के दायरे में आएंगे.
● कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति जोकि हड़ताल शुरू करता है या ऐसी किसी भी हड़ताल में भाग लेता है जोकि इस विधेयक के अंतर्गत गैर कानूनी है तो उसे एक वर्ष की अवधि तक की जेल या 10000 रुपये जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है.
बहुत, बहुत बड़ा काम किया है मोदी सरकार ने. ओर बहुत बड़ी हिम्मत भी दिखाई है इन भांड वामपंथी यूनियनों के खिलाफ जाने में. मोदी सरकार इन जैसों के सामने कभी झुकेगी नहीं. मोदी सरकार का पहला मोटो है राष्ट्र को दुश्मनों से रक्षा करना, इसके विपरीत जो जाएगा, उसको निपटा दिया जाएगा.
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