कमाल हैं,बिहार,इसे इतिहास,सहेज कर रखना,कभी,नही,आया, या मानो,आदत,ही नही है इसे,
बताओ! क्या सहेज कर रखते हो ??
जवाब आएगा जातिवाद, बेरोजगारी, आपदाओं की अनगिनत संख्या और जिन्दाबादी जुनूनी नेता और उनके कार्यकर्ता।।
कमाल है बिहार।
जातिवाद रग-रग में पनपता हैं,
और राजनीतिक गलियारो में खूब जातियों की काउंटिंग होती हैं ,
फिर उसके हिसाब से ब्रांड एम्बेसडर चुना जाता हैं।।
कभी श्री कृष्ण सिंह की तस्वीरों को दिखा कर उनके नाम पर राजनीति होती हैं तो कभी लोकनायक को महान बता कर उनके चलने वाले राजनीतिक रास्तो का खून किया जाता हैं। कभी पटना को जलाया जाता हैं, तो कभी आरा, बक्सर, मुंगेर, जहानाबाद को उकसाया जाता हैं।।
कभी लालू के भूरा बाल को साफ करने की योजना को आगे बढ़ाया जाता हैं तो कभी नीतीश बाबू स्वर्ण जातियों से कोल्ड वॉर करते नजर आते हैं।।
कमाल है बिहार।
कभी बिहार केसरी की जयंती भूल जाते हैं तो कभी अनुग्रह नारायण के नाम पर सत्ता पाने की कोशिश होती हैं।।
कभी लालू नाइंटीज के पोस्टर बॉय बनते हैं तो कभी सुशासन के नाम पर राजनीति की ब्रॉडकास्टिंग होती हैं।।
प्रेजेंट को गंगा में बहा,अपने पास्ट को ही देख कर मुस्कुरा देता हैं बिहार।।
कमाल हैं बिहार!
खुद से लड़ता हैं, खुद से जीतता हैं,
खुद में ही मशगूल रहता हैं बिहार,
तमाम उलझनों के बीच, सुशासन के नारे पर हँस देता हैं बिहार,
कमाल है बिहार!
ये इस उम्मीद में की कही किसी कोने में बिहार जिन्दाबाद रहे।
जय बिहार!!
©बिहार की बात
–तस्वीर फेसबुक से मिली हैं।
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