जिसको गोसेवा मिल गई समझ लो उनको तो गोविन्द मिला हुआ ही है* – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

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Swami gopalanand Saraswati

*जिसको गोसेवा मिल गई समझ लो उनको तो गोविन्द मिला हुआ ही है* – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

सुसनेर। मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन जी यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन वर्ष २०८१, से  घोषित *गो रक्षा वर्ष*  के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा,श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर स्थित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में  चल रहें *एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव* के 92 वे दिवस पर  श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए  स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती जी महाराज ने बताया कि  भाग्यशाली होता है वह पुरुष-नारी जिसको सनातन संस्कृति के आधार स्तंभ से जुड़ने जा अवसर मिलता है,*भाग्यशाली लोग होते है जो सनातन धर्म में जन्म लेते है और सनातन धर्म में जन्म लेने के बाद वह सनातन धर्म की जड़ गोमाता से जुड़े रह जाएं* ये बहुत भाग्य की बात है,जीव तो सृष्टि में बहुत है,लेकिन भारत भूमि में जन्म लेने वाले महान है,भारत भूमि में भी वे लोग ज्यादा महान है, जिन्होंने सनातन धर्म में जन्म लिया, सनातन धर्मियों में भी वे *सबसे महान है,भाग्यशाली है,जिसके जीवन में भगवान ने गो सेवा दी है* क्योंकि *जिसको गोसेवा मिल गई समझ लो उनको तो गोविन्द मिला हुआ ही है* किसी को प्रकट रूप में मिला हुआ है तो किसी को गुप्त रूप में वह किसी को सुप्त रूप में मिला हुआ है ,*आज नहीं तो कल जो गुप्त अथवा सुप्त रूप में है वह भी प्रकट हो ही जाएगा।*


स्वामीजी ने आगे बताया कि भारत को हिंदुराष्ट्र बनाने की सब बात करते है लेकिन *जब भारत की तरुणाई अर्थात युवा शक्ति आगे नहीं बढ़ेगी तब तक भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं बन सकता* यानि *युवाओं के माध्यम से ही हिंदुराष्ट्र अपनी जगह से उठ जाएगा* ।

Aarti utarte hue Mata bahan


स्वामीजी ने बताया कि पहले मुगलों ने फिर अंग्रेजों ने हमारी मति खराब करने का पूरा प्रयत्न किया यानि मुगलों ने हमारे पेयजल के स्त्रोतों में गोमांस आदि डालकर हमें भ्रष्ट किया और अंग्रेजों ने तो चाय रूपी जहर हमारे घर घर तक पहुंचा दिया और चाय कॉफी पीने वाला व्यक्ति अपने आप में राक्षस ही है जबकि भगवती गोमाता ने छाछ एवं दूध रूपी ऐसे अमूल्य गव्य हमें दिए जिससे पीकर हम हमारे स्वास्थ्य रक्षा के साथ साथ सतोगुण के माध्यम से हम सिद्धि भी प्राप्त कर सकते है। अर्थात गोमाता की छाछ से आतों की सभी बीमारियां ठीक हो जाती है और दूध के माध्यम से सतगुण आएगा और सतगुण से जप तप  का फल मिलता है ।



92 वें दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आगर जिले के सामाजिक समरसता प्रमुख हेम सिंह राजपूत बडौद, बाड़मेर के गोभक्त प्रहलाद राय एवं  नागनेचा गोशाला बांद्रा बाड़मेर के करनाराम ने भी भाग किया ।

Vah Katha sunte hue Mata bahanon



*92 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के झालावाड़ जिले की पिड़ावा तहसील से*
एक वर्षीय गोकृपा कथा के 92 वें दिवस पर राजस्थान के झालावाड़ जिले की धारा खेड़ी  ग्राम की सैकड़ों मातृशक्ति  अपने ग्राम की कुशहाली एवं जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं ,गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन, गो पुष्टि यज्ञ करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
चित्र 1 : गोकथा सुनाते स्वामी गोपालानंद सरस्वती।
चित्र 2 : गोकथा में उपस्थित गौभक्त।
चित्र 3 व 4 : गोभक्तो का सम्मान करते समिति सदस्य।
चित्र 5 :  गोकथा में गोमाता को चुनड़ ओढाती गोभक्त ।
चित्र 7 : गो पुष्टि यज्ञ करते गोभक्त
चित्र 8 : गोमाता के किये चुनड़ लाते गोभक्त

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