सहारा इण्डिया परिवार” के एक कार्यकर्ता एवं जमाकर्ता की सरकार, संस्था, सेबी, सी आर सी, सुप्रीम कोर्ट से विनम्र अपील।
*करीबन वर्ष 2010 से “सहारा सेबी विवाद” हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के मध्य विचाराधीन हैं! तत्कालीन सरकार के शासनकाल मे सेबी नामक संस्था जो सरकार के अधीनस्थ कार्यरत हैं,
उसके द्वारा सहारा संस्था पर एक मन गडंत यह आरोप लगाकर कि इस संस्था में जमाकर्ता फर्जी हैं! अव्वल तो इसकी एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर गहन जाँच होनी चाहिए थी!गलत साबित होने पर सरकार द्वारा नियमानुसार विधिवेता से सलाह मशविरा दण्ड तत्काल देकर निर्णय ले लिया जाता तो आज 15 लाख कार्यकर्ता एवं लाखो कार्यालय वर्कर जो संख्या बल में भारतीय रेलवे से दुसरे नम्बर पर माना जाता हैं!
देश के करोडों सम्मानित जमाकर्ताओ की रोजी रोटी छीनकर उनके परिवारों को दर बदर भटकने पर विवश कर दिया! यह स्थिति एवं बेरोजगारी नही फैलती! तत्कालीन सरकार ने यह सबसे बडा पाप करना कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं! सरकार का दायित्व बनता हैं कि बेरोजगार को रोजगार उपलब्ध कराए, यहाँ ऊल्टा रोजगार पर लगे हुए को बेरोजगार कैसे किया जाए का यत्न किया गया ? क्या यह तत्कालीन सरकार की मंशा में खोट को नही दर्शाता ? एक साधारण व्यक्ति भी बता सकता हैं दाल मे अवश्य कुछ काला तो हैं ? आज 15 लाख कार्यकर्ता, लाखो ऑफिस वर्कर एवं करोडों सम्मानित जमाकर्ता के परिवारों के बच्चो को रोजी रोटी के लिए मोहताज कर दिया! इतना बड़ा महा पाप, महा त्रासदी, एवं महा अन्याय तत्कालीन सरकार ने किया, इतना ही महा पाप हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट ने किया! क्यो कि कोर्ट मे सुनवाई समय रहते निर्णय ले लिया जाता तो भी शायद यह भयंकर स्थिति पैदा नही होती ?
सहारा प्रमुख संस्था के अभिभावक को अधिकार से उपर उठकर दो साल तक सुप्रीम कोर्ट के विद्वान जज साहब जस्टिस जे एस खेहर नाम से विख्यात ने न्यायिक अभिरक्षा में रख लिया! जस्टिस खेहर अब खरे खोटे होने नही होने की तो भगवान ही जाने, वह भी सेवानिवृत्त हो गये! विद्वान जज साहब के विरूद्ध महाभियोग का मामला भी शायद भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदया के संज्ञान तक पहुंचा!तत्कालीन सरकार ने इतने बडे विशाल जन समूह को बेरोजगार करते वक्त जरा भी नही सोचा? राष्ट्रीयता की भावना मन मे कभी नही आई ? फिर तो यह कहना भी अतिशयोक्ति नहीं होगा कि कहावत हैं, “देवरे जाने की कम खीर खाने की जादा” ! भगवान के मन्दिर कोई दर्शन के लिए जाता हैं तो दूसरा सोचता हैं कि दर्शन तो ठीक, वहाँ खीर बनी हैं खाएंगे! तत्कालीन सरकार के शासनकाल को (पोपाबाई) का शासन कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं!
सुप्रीम कोर्ट, सेबी, सरकार के मध्य पूर्ववर्ती सरकार कहे या वर्तमान सरकार की स्थिति मे पार दर्शिता का अभाव होने से कार्यकर्ता एवं सम्मानित जमाकर्ता दोनो असमंजस में हैं! वर्तमान सरकार से यह उम्मीद अवश्य जगी जिससे कार्य कर्ता, कार्यालय कर्मचारी एवं सम्मानित जमाकर्ता मे उत्साह का माहोल पैदा हुआ लेकिन इस पोर्टल की जटिलता ने सभी के सपने चूर चूर कर दिए! सात दशकों के पश्चात भारत के भाग्योदय से एक संत महात्मा,”राष्ट्र भक्त” राष्ट्र प्रेमी, सत्य निष्ठ, निष्पक्ष, ईमानदार, लोह पुरूष, महान योद्धा, निडर, प्रधान मंत्री देश को मिला! जिनके मन मे केवल मात्र एक ही जिज्ञासा, एक ही उद्देश्य चिडियाँ की ऑख की तरह सबका विकास, सबका साथ, सबका विश्वास! इस निति ने राष्ट्र को निरंतर प्रगति के पथ पर बढते हुए प्रगति के शिखर को प्राप्त करने के लिए तेज गति से सतत गतिशील है! इसके परिणामस्वरुप देश मे चहुँ मुखी विकास हुआ!आवागमन की सुविधा के लिए सड़कों का जाल बिछाया, यात्रा की सुगमता मे कम समय मे लंबी यात्रा करना संभव हुआ! रेल व्यवस्था मे आमूल-चूल परिवर्तन हुआ! भारतीय सेना जिन उग्रवादियों जिहादियो के पत्थर खाने पर विवश थी उनके हाथ बंधे हुए थे!आज भारतीय सेना आधुनिक हथियारो शस्त्रों से लेस सुरक्षित एवंं सुसज्जित हो गई है!आए दिन दुश्मन देश भारत पर बार बार ऑख उठाते, आज सेना की ताकत एवं क्षमता के आगे गर्दन नीची किए रहते हैं! आम आदमी मे सुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई हैं! आए दिन उग्रवादियों जिहादियो के बम धमाके होते, अब सब शान्त हैं! हमारी माताओ, बहनों, बच्चियों को विधर्मियों के द्वारा बलात्कार, हत्या, अपहरण का शिकार होती थी, आज सुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है!
हर तरह से देश विकास की ओर बढ रहा है! भारत विश्व गुरु बनने के शुभारंभ की कुछ कदमो की ही दुरी पर है!
आदरणीय प्रधानमंत्री जी आपको देश की 140 करोड जन संख्या की शिक्षा, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा, बेरोजगार को रोजगार उपलब्ध कराने की चिंता रहती है! तब “सहारा इण्डिया परिवार” के कार्यकर्ताओं कर्मचारियों एवं सम्मानित जिनकी संख्या लाखो मे नही करोडों मे हैं! उनकी चिन्ता क्यो नहीँ ? माफ करना मेरे इस प्रश्न को आप अन्यथा नहीं लेवें, “पिछली सरकार ने सहारा इण्डिया संस्था को ध्वस्त कर नेस्तनाबूद कर दिया”!
करोडो परिवारों के बच्चों को रोटी के लिए मोहताज कर भीख मागने पर विवश कर दिया! लेकिन आपकी सरकार के शासनकाल में सहारा इण्डिया परिवार की सुनवाई क्यो नही हो रही ? आपके कार्य काल मे भी इतना लंबा समय हो चुका है, सहारा कार्यकर्ता एवं सम्मानित जमाकर्ता दोनो असमंजस में हैं!सुप्रीम कोर्ट, सरकार, CRC, सेबी, संस्था, सभी की ओर से कोई वक्तव्य नही! क्या सेबी, C.R.C.,सुप्रीम कोर्ट किसी के लाखो करोड़ परिवार की रोजी रोटी का संकट ध्यान में नही ? अगर नही तो कहावत है कि “राजाओ के शासन काल मे खेमली गुडली लूट गयी”! तो दरबार ने कहा कि वो राण्डे बाहर क्यो निकली ? हजूर वो राण्डे नही, अपने ही उदयपुर रियासत मे दो गाँव हैं! डेबारी के पास दोनो को लूट लिया, तब देरी क्यो ? जल्दी सेना भेजो,
लूटने के बाद सेना भेजी किस काम की ?
अगर वर्तमान सरकार के सहारा इंडिया के करोडो परिवार की रोजी रोटी का मामला ध्यान हैं तो पोर्टल की जटिलता क्यो ? वही कहावत “खेमली गुडली लूटने के बाद सेना भेजना किस काम की” “अगर करोडो सम्मानित जमाकर्ताओं, कार्य कर्ताओ के बच्चों के परिवार नष्ट एवं बिखर जाने के बाद भुगतान करना किस काम का”!
माननीय प्रधानमंत्री जी, माननीय गृहमंत्री जी, आपसे मेरी एक ही वेदना भरी पुकार हैं, करबद्ध निवेदन है कि कृपया पोर्टल की जटिलता को तुरंत खत्म कर सरकार की निगरानी में सहारा काउंटर से भुगतान की समुचित व्यवस्था समय रहते शीघ्र प्रारंभ करावे ताकि कुछ परिवार तो नष्ट होने से अब भी बच ही जाएंगे! “प्रधानमंत्री जी, आप एक महान दयावान संत हैं”, जिनके संस्कार एवं जहन मे दया की भावना का भरपूर समावेश हैं! मैं एक सहारा अभिकर्ता के साथ साथ भाजपा कार्यकर्ता हूँ, भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता कभी गलत ऊच्चारण नही करता! सहारा के करोडो सम्मानित जमाकर्ताओं, कार्य कर्ताओ एवं ऑफिस कर्मचारियों के परिवारो को आप पर पूरा
भरोसा तथा सो प्रतिशत अपेक्षा है कि आप इस लोकसभा चुनाव के पहले जमाकर्ताओ का भुगतान सुनिश्चित कराने की कृपा करें! मैं भाजपा कार्यकर्ता होने के नाते यह विश्वास रखता हूँ कि करिब सन 2012 से जिन परिवारों के बच्चों पर भुगतान के अभाव में रोजी रोटी के लाले पडे हुए हैं, भुगतान से उन परिवारो के बच्चों तथा अभिभावकों के मन मे निश्चित कमल खिलेगा! चुनाव के समय यह कमल निश्चित सकारत्मक प्रभाव पैदा करेगा!
मैं आपसे पूरी उम्मीद रखता हूँ कि मेरा विनय पत्र आपके पास पहुंचने पर आपके मन मे उन बच्चों की पीडा एवं कष्ट का अनुभव अवश्य जाग्रत होगा एवं भुगतान की समुचित व्यवस्था प्रारंभ कराएगे!_&-आपका अपना ही स्नेही शुभेच्छु, एक राष्ट्र प्रेमी, “समाज चिंतक” ‘निम्बाराम प्रजापत सहारा इण्डिया, कार्यकर्ता कोड नम्बर, 209510609 (सिणधरी)
एवं
भारतीय जनता पार्टी पुर्व मंडल
अध्यक्ष सिणधरी
जिला बालोतरा, बाङमेर
(राजस्थान)